ब्रजाचार्य पीठऊंचागांव, बरसानाEnglish

जन्म 1531, मदुरै · ब्रज आगमन 1545

ब्रजाचार्य श्री नारायण भट्ट जी

जिनके आगे लाडली जी प्रकट हुईं, जिन्होंने ब्रज की लीला स्थलियाँ फिर से खोजीं।

श्रील गोस्वामी नारायण भट्ट जी महाराज का पारंपरिक चित्र: वन में खड़े, हाथ में पोथी, एक हाथ से किसी स्थल की ओर संकेत
पीठ का पारंपरिक चित्र
चित्र: Kridha20, CC BY-SA 4.0

उन्होंने हमें क्या दिया

आज ब्रज में तीर्थयात्री जो देखते और करते हैं, उसका बड़ा हिस्सा नारायण भट्ट जी का रखा हुआ है। हर बात के साथ उसका स्रोत है।

चार सौ वर्ष पुरानी गवाही

लगभग 1600 में नाभादास जी ने श्री भक्तमाल में उन पर पूरा छप्पय लिखा।

ब्रजभूमि उपासक भट्ट सो रचि पचि हरि एकै कियो ॥गोप्य स्थल मथुरामंडल जिते बाराह बखाने ।ते किये नारायन प्रगट प्रसिध पृथ्वी में जाने ॥भक्तिसुधा को सिंधु सदा सत्संग सभाजनपरम रसग्य अनन्य कृष्णलीला को भाजन ॥ग्यान समारत पच्छ को नाहिन कोउ खण्डन बियो ।ब्रजभूमि उपासक भट्ट सो रचि पचि हरि एकै कियो ॥ ८७॥

ब्रजभूमि के उपासक इन भट्ट जी को हरि ने बड़े यत्न से अनोखा बनाया। वराह पुराण में मथुरा मंडल के जितने गुप्त स्थल बताए गए हैं, उन सबको नारायण भट्ट जी ने प्रकट किया और सारी पृथ्वी ने उन्हें जाना। वे भक्ति रूपी अमृत के सागर थे, सदा संतों के संग रहते थे, रस के मर्मज्ञ थे, अनन्य भाव से कृष्ण लीला के पात्र थे, और ज्ञान और शास्त्र में कोई उनकी बात काट नहीं सकता था।

नाभादास जी, श्री भक्तमाल, छप्पय 87 · पूरा पाठ

1883 में मथुरा के अंग्रेज़ कलेक्टर एफ़. एस. ग्राउज़ ने लिखा कि ब्रज के घेरे की हर झील और हर कुंज को अलग नाम उन्हीं से मिला।

"it was from him that every lake and grove in the circuit of Braj received a distinctive name"

स्रोत: ग्राउज़, 1883

उनके अपने शब्दों में: जैसे शास्त्रों में श्रीमद्भागवत कृष्ण का ही रूप है, वैसे ही पृथ्वी पर ब्रजमंडल कृष्ण का रूप है।

ब्रज भक्ति विलास 1.92 · मूल श्लोक विद्वान की जाँच के बाद यहाँ जुड़ेगा

स्रोत: ब्रज रस, ब्रज भक्ति विलास 1.92

जीवन के छह पड़ाव

  1. 1531
    मदुरै में जन्म
  2. 1545
    ब्रज आगमन, राधाकुंड पर दीक्षा
  3. 1552
    ब्रज भक्ति विलास
  4. लगभग 1557
    ऊंचागांव में बसे
  5. 1569
    बरसाना में लाडली जी का मंदिर
  6. आज
    उनकी परंपरा श्रीजी की सेवा में

1569 का वर्ष संगीत नाटक के 2005 के शोधपत्र से है। मंदिर के वर्ष पर स्रोत अलग हैं; जीवन वाले पन्ने पर पूरी बात है।

उनकी परंपरा आज

ऊंचागांव की ब्रजाचार्य पीठ पर उनके वंशज रहते हैं। श्रीजी के सेवायत गोस्वामी इसी परंपरा से कंठी दीक्षा लेते हैं, और हर राधाष्टमी पर गर्भगृह में पहली पूजा, नारायण भट्ट जी के स्थापित राधा यंत्र की पूजा सहित, यही परंपरा करती है।

स्रोत: हिस्ट्री पंडित, वृंदावन टुडे

परंपरा के बारे में

ललितापीठाधीश्वर गोस्वामी श्री कृष्णानंद भट्ट जी महाराज, पीले वस्त्र और दुपट्टे में मुस्कुराते हुए
ललितापीठाधीश्वर गोस्वामी श्री कृष्णानंद भट्ट जी महाराज, उनके वंशज।चित्र: ब्रजाचार्य पीठ

ऊंचागांव आएँ

ऊंचागांव बरसाना से लगभग एक मील पश्चिम में है, जहाँ ललिता सखी रहीं और सखियों के साथ खेलीं। यहाँ नारायण भट्ट जी की समाधि है, उसके पास दाऊजी का मंदिर है जहाँ उनके लाड़ले ठाकुर विराजते हैं, और पहाड़ी पर ललिता जी का मंदिर।

स्रोत: इस्कॉन (ऊंचागांव), इस्कॉन (ललिता सखी), हिस्ट्री पंडित
ऊंचागांव में श्री नारायण भट्ट जी की समाधि, गुलाल से रंगे आँगन में दर्शन करते भक्त
ऊंचागांव में उनकी समाधि।चित्र: हिस्ट्री पंडित

कार्तिक के 30 दिन, 30 स्थल

26 अक्टूबर से 24 नवंबर तक हर दिन एक स्थल, जिसे उन्होंने खोजा या जिससे उनकी कथा जुड़ी है।

26 अक्टूबर से शुरूपहला स्थल: उनकी समाधि, ऊंचागांवउस संत की समाधि, जिनके आगे लाडली जी प्रकट हुईं।तीसों स्थल देखें

2031 की ओर

नृसिंह चतुर्दशी 2031 को उनकी 500वीं जयंती है, अब से 5 वर्ष बाद।

  • कार्तिक के 30 स्थल शुरू 26 अक्टूबर 2026
  • कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026
  • नृसिंह चतुर्दशी, उनकी जयंती 18 मई 2027
  • राधाष्टमी 8 सितंबर 2027
  • वामन द्वादशी 12 सितंबर 2027

यह साइट ब्रजाचार्य पीठ, ऊंचागांव की है। किसी को उनकी कथा भेजनी हो तो: